नगर में पांच सट्टा एजेंटों पर सट्टे काटने की हुई कार्रवाई खवाडो पर मेहरबान प्रशासन,पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
औपचारिक कार्रवाई तक ही सीमित रही पुलिस, सवालों के घेरे में जिम्मेदार
आमला। नगर में सट्टे का कारोबार लंबे समय से खुलेआम फल-फूल रहा है। हाल ही में पुलिस ने पांच एजेंटों पर औपचारिक कार्रवाई कर खानापूर्ति तो कर दी, लेकिन शहरवासी इसे सिर्फ दिखावा मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों में दर्ज हो रही है, जबकि असल में सट्टे का धंधा यथावत चल रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जब इन खवाड़ों पर आधा सैकड़ा से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और तीन-तीन बार जिला बदर की कार्रवाई हो चुकी है, तब भी वे कैसे बेखौफ सक्रिय हैं। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
अंडरग्राउंड कारोबार में बढ़ोतरी, पुलिस अनजान बनने का खेल
सट्टा कारोबारियों ने पुलिस की ढीली निगरानी का फायदा उठाकर अब अंडरग्राउंड सिस्टम भी सक्रिय कर दिया है। ग्राम रतेड़ा मेन रोड, जम्बाड़ा और रतेड़ा रोड पर साइकिल की दुकान समेत दर्जनों स्थानों पर खुलेआम पट्टियां काटी जा रही हैं। बोडखी क्षेत्र में भी एक दर्जन जगहों पर एजेंट सक्रिय हैं। शहर में करीब डेढ़ सौ एजेंट बताए जाते हैं जो गांव-गांव तक सट्टे का जाल फैलाए हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जरिए भी गुप्त रूप से दांव लगाए जा रहे हैं, जिससे पुलिस तक सही सूचना पहुंच ही नहीं पाती। सवाल यह है कि आम लोग सट्टे की गतिविधियों से वाकिफ हैं, तो फिर जिम्मेदार विभाग क्यों अनजान बने हुए हैं।
प्रशासन की नाकामी से खौफमुक्त खवाड़, बढ़ रहा नेटवर्क
शहर के तीन प्रमुख सट्टा खवाड़ों पर कई बार कार्रवाई और जिला बदर के आदेश हो चुके हैं, इसके बावजूद उनका नेटवर्क और मजबूत होता जा रहा है। एक खवाड़ पर करीब आधा सैकड़ा प्रकरण दर्ज हैं, फिर भी वह आराम से अपना कारोबार चला रहा है। जानकारों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह धंधा जड़ से खत्म नहीं हो पा रहा है। आमजन मानते हैं कि यह महज औपचारिक कार्रवाई कर सरकार और उच्चाधिकारियों को दिखाने की कवायद है। नतीजा यह है कि खवाड़ और उनके एजेंट पहले से ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। अब लोग पूछ रहे हैं कि जब अपराधी खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो जिम्मेदार विभाग कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे।